Mystical Poetry

Purpose of Life

By Dr. Ashwini Mokashi   For the ninth Episode of the Kabiriyat, we have chosen an interesting poem by Saint Kabir that illustrates the purpose of life. हंसा करो पुरातन बात। कौन देस से आया हंसा, उतरना कौन घाट। कहाँ हंसा बिसराम किया है, कहाँ लगाये आस॥ अबहीं हंसा चेत सबेरा, चलो हमारे साथ। संसय-सोक …

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हमारे भीतर की चिंगारी (कबीरियत कार्यक्रम – एपिसोड 7)

हमारे भीतर की चिंगारी (कबीरियत कार्यक्रम – एपिसोड 7) डॉ अश्विनी मोकाशी द्वारा आज हम जिस कविता की चर्चा कर रहे हैं, उसमें कहा गया हे कि ध्यान के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक क्षमता को कैसे महसूस किया जाए। संत कबीर ने अपनी अनेक कविताओं में इस विषय पर अलग अलग दृष्टिकोण से उल्लेख किया …

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Importance of Breathing – Saint Kabir’s Philosophy

by Ashwini Mokashi, Ph.D. Continuing with our discussions of Saint Kabir’s poetry and his philosophy, we would like to focus on a Doha, which describes the importance of breathing. This Doha is taken from a book called ‘Paramartha Sopan,’ compiled by Professor R. D. Ranade (1886-1957). He was a Vice-chancellor of the Allahabad University, a …

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